जनजातीय विद्यार्थियों को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण हेतु टीएडी, राजस्थान एवं सीपेट में हुआ करार

राजस्थान के जनजातीय युवाओं को निःशुल्क प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें नवीनतम तकनीकी से जोड़ने तथा उनके कौशल को निखारने हेतु राज्य सरकार के जनजातीय क्षेत्रीय विकास विभाग तथा भारत सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के जयपुर स्थित संस्थान सीपेट संस्थान के बीच एक महत्वपूर्ण करार हुआ है।

इस बारे में जानकारी देते हुए संयुक्त शासन सचिव, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, नेहा गिरी ने बताया कि जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग एवं सीपेट के बीच हुए समझौते के तहत सीपेट जयपुर 90 जनजातीय विद्यार्थियों को प्लास्टिक प्रोसेसिंग और सीएनसी लेथ मशीन के तीन विभिन्न कार्यों के लिये 3 महीने का निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण देगा। समझौता पत्र पर टीएडी की ओर से आयुक्त जितेन्द्र कुमार उपाध्याय एवं सीपेट संस्था के निदेशक डॉ. सैय्यद अमानुल्ला ने हस्ताक्षर किये।

श्रीमती गिरी ने बताया कि इसी तरह का एक अन्य करार एमएसएमई टेक्नोलॉजी, भिवाड़ी और टीएडी के बीच भी हुआ है जिसमें 60 विद्यार्थियों को 5 महीनों के लिए सीएनसी मशीन का निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण दिलाया जायेगा। इन दोनों प्रशिक्षणों पर टीएडी द्वारा क्रमशः 48 लाख रूपये तथा 40 लाख रूपये व्यय किये जायेंगे।

इस मौके पर आयुक्त, टीएडी जितेन्द्र कुमार उपाध्याय ने कहा कि भारत सरकार के ये दोनों ही प्रशिक्षण संस्थान उत्कृष्ट श्रेणी के हैं व इनके निदेशकों के अनुसार प्रशिक्षण के पश्चात प्रशिक्षित विद्यार्थियों को 90 प्रतिशत रोजगार मिलने की गारंटी रहती है।

श्री उपाध्याय ने बताया कि प्लास्टिक प्रोसेसिंग प्रशिक्षण के लिये जहाँ जनजातीय समुदाय का राजस्थान का मूल निवासी होना, 8 वीं कक्षा उत्तीर्ण व आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होना अनिवार्य है वहीं सीएनसी प्रशिक्षण के लिये अभ्यर्थी को जनजातीय समुदाय का, राजस्थान का मूल निवासी, आयु 18 से 35 वर्ष के बीच व 10 वीं कक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए।

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