तेजस्वी यादव: मोदी का सर्वोत्तम विकल्प

एच. एल. दुसाध| मोदी की भारत-विभाजक नीतियों से त्रस्त लोग उनका विकल्प ममता बनर्जी में ढूँढने लगे हैं। पर, क्या ममता और मोदी में कोई फर्क है? नहीं! दोनो ही सवर्णपरस्त है। कुछ कमियों और सवालों के बावजूद मोदी की राजनीति को फिनिश करना है तो केवल तेजस्वी को ताकत देनी होगी।
बहरहाल ममता-नवीन पटनायक और केजरीवाल इत्यादि में मोदी का विकल्प तलाशने वाले इस बेसिक बात को नज़रंदाज़ कर रहे हैं कि दुनिया का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है जो अतीत की भाँति आज भी जारी है और आने वाली सदियों में जबतक मानव सभ्यता का वजूद है: वर्ग संघर्ष चलता रहेगा।
आजाद भारत में हिंदू शासकों ने भी यह खेल खूब खेला लेकिन वर्ग संघर्ष को तुंग पर पहुचाया है मोदी ने। अपने स्व-वर्ग अर्थात सवर्णो के हाथों में मार्क्सवादियों की भाषा में उत्पादन के समस्त साधन और आपके मित्र दुसाध की भाषा में शक्ति के समस्त स्रोत सौंपने के इरादे से ही मोदी जी ने राज्य का अधिकतम इस्तेमाल विनिवेशिकरण-निजीकरण-लैट्रल इंट्री की दरिया बहाने, अनुच्छेद 370 का खात्मे और नागरिक संशोधन कानून इत्यादि बनाने में किया।
आज भारत में स्वास्थ्य और शिक्षा की स्थिति विश्व में सबसे बदतर है तो उसके पीछे सवर्ण शासकों की वर्ग संघर्ष से प्रेरित नीतियां हैं। उन्हें पता स्वास्थ्य और शिक्षा की जो व्यवस्था है, वह अल्प संख्यक सवर्णो के लिए पर्याप्त होगा।इसकी कमी का जिनपर असर होना है वे गैर-सवर्ण हैं।
अब सवाल पैदा होता है जिस स्वाधीन भारत में पंडित नेहरू से शुरू हुआ वर्ग संघर्ष मोदी-राज में तुंग पर पहुंचा है, उस भारत में अगर संयोग से मोदी को हटाकर सत्ता ममता, पटनायक या केजरीवाल के हाथ में दे दी जाती है तो क्या कुछ फर्क आयेगा? बिल्कुल नहीं! ये भी कमोबेश मोदी की भाँति वर्ग संघर्ष का खेल खेलते हुए सवर्णो के हाथ में सबकुछ सौंपने में राजसत्ता का इस्तेमाल करेंगे। ऐसे में जो लोग मोदी का विकल्प ममता, पटनायक, कजरीवाल में तलाशते हैं, दुसाध उन्हें शातिर हिंदू मानता है। इनके सत्ता में आने से इंडिया चमकेगा पर, भारत की दशा और बदतर होगी। क्योंकि ये शक्ति के स्रोतों का न्यायोचित बंटवारा न कराकर सवर्णो का एकाधिकार ही पुष्ट करेंगे।
वास्तव में यदि कोई मोदी को देश के लिए घातक समझते हुए किसी को विकल्प के रूप में पेश करना चाहता है तो उसे उस वर्ग से कोई चेहरा ढूँढना होगा, जिसे फिनिश करने में हिंदू शासकों, विशेषकर मोदी ने सारी सीमाएं तोड़ दी है। और जब वंचित वर्गों से मोदी का विकल्प ढूंढेंगे तो 1-5 तक विकल्प सिर्फ और सिर्फ तेजस्वी यादव ही नजर आयेंगे। कुछ कमियों और सवालों के बावजूद मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं मोदी का बेस्ट विकल्प तेजस्वी यादव ही हैं। तेजस्वी यादव का तेज हमने पिछले बिहार विधान सभा चुनाव में देखा है। उस चुनाव में अगर तेजस्वी हिंदू अर्थात सवर्ण सलाहकारों से प्रभावित होकर सामाजिक न्याय की अनदेखी नहीं किये होते तो मोदी को बंगाल से भी शिकस्त बिहार में मिलती।
लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के संस्थापक अध्यक्ष और देश के जाने माने सामाजिक चिंतक हैं। लेख में व्यक्त विचार लेखक की निजी राय है।

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