नीतीश कुमार वही काट रहे हैं जो उन्होंने बोया है

नीतीश कुमार भाजपा के एक के बाद एक प्रहार से पस्त नजर आ रहे हैं। अरुणाचल प्रदेश में 6 जेडीयू विधायकों को भाजपा द्वारा तोड़े जाने के बाद वह लगातार यह बयान दे रहे हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री पद की चाह नहीं है और उन्होंने दबाव में यह पद स्वीकार किया है। कहाँ तो वह भाजपा से विधानसभा चुनाव में लोजपा को आगे कर उनके कद को कम करने की साजिश का प्रायश्चित करवाना चाहते थे कहाँ भाजपा ने उन्हें पहले विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव और फिर अरुणाचल में झटका दे दिया।

आज हालत यह है कि नीतीश खुद को इस हद तक निरीह पा रहे हैं कि उन्हें और उनकी पार्टी के लोगों को विक्टिम कार्ड खेलना पड़ रहा है। लेकिन सवाल यह है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है? निःसंदेह स्वयं नीतीश कुमार। पिछले विधानसभा चुनाव में राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ने और सरकार बनाने के बाद जिस तरह नीतीश ने पलटी मारकर भाजपा के साथ सरकार बनाई उसने उनकी साख को जबरदस्त आघात पहुँचाया। एक बार भाजपा के पाले में जाने के बाद भाजपा ने धीरे धीरे उन्हें कमजोर करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया। इस दौरान जहाँ भी मौका दिखा भाजपा ने नीतीश को बौना दिखाने की कोशिश की। याद कीजिये पटना विश्वविद्यालय का शताब्दी वर्ष समारोह जब खुद नीतीश कुमार ने दोनों हाथ जोड़कर प्रधानमंत्री मोदी से पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने का अनुरोध किया लेकिन प्रधानमंत्री ने मंच पर ही उसे ख़ारिज कर दिया।

विधानसभा चुनाव में चिराग खुद को मोदी का हनुमान कहकर प्रचार करते रहे लेकिन एक बार भी न तो प्रधानमंत्री मोदी और न ही गृह मंत्री अमित शाह ने उनके खिलाफ कोई बयान दिया। उलटे प्रधानमंत्री मोदी ने तो नीतीश के साथ अपनी संयुक्त चुनाव सभा में रामविलास पासवान की तारीफ तक कर दी और नीतीश उसे चुपचाप सुनाने के अतिरिक्त कुछ नहीं कर सके।

भाजपा बिहार में विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी हथियाने के बाद अब मंत्रिमंडल में भी अपना दबदबा चाहती है। उसके नेता राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था के लिए नीतीश कुमार पर सवाल उठा रहे हैं। लव जेहाद को लेकर लगातार भाजपा नेता बिहार में कानून बनाने की बात कर नीतीश कुमार को सांसत में डाले हुए हैं। नीतीश ने सत्ता मोह में जो समझौते किये उसका भाजपा ने पूरा फायदा उठाया और अब नीतीश को सबसे अलग थलग कर उन्हें अपने इशारों पर चलने को मजबूर कर रही है। नीतीश इस बेबसी के दौर से कैसे और कब निकलते हैं यह तो समय के गर्भ में है लेकिन फ़िलहाल उनके सामने बहुत बड़ी चुनौती खड़ी है।

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