बीजेपी कांग्रेस के भरोसे बहुजन समाज को गुलामी और निराशा ही मिलेगी

नरेन्द टंडन| बीजेपी कांग्रेस भाई-बहन जैसी संबंध रखने वाली भारत देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है जिसका मकसद बहुसंख्यक जमात को बेवकूफ बनाकर पारी पारी सत्ता पर काबिज होना,बहुजन समाज पर राज करना है। ज्यादातर ओबीसी बंधु इन्हीं पार्टी के पीछे अबतक घूमते रहे हैं और बदले में उन्हें लाचारी बेबसी के सिवा कुछ नहीं मिला। बीजेपी कांग्रेस केवल राजनीतिक परिवर्तन चाहती है उसी तरह पिछड़ा समुदाय भी बीजेपी कांग्रेस की पारी पारी सत्ता चाहती रही है जबकि बीजेपी कांग्रेस आर एस एस व्यवस्था परिवर्तन (सम्पूर्ण परिर्वतन) की लड़ाई कभी नहीं लड़ी, कभी बीजेपी को कभी कांग्रेस को सत्ता में लाना देश की कमान सौपना परिवर्तन की निशानी नहीं है और इसे ही परिवर्तन समझ लेना मूर्खता है।

मेरे दृष्टिकोण से काम रहन-सहन वेशभूषा के आधार पर जाति व्यवस्था का निर्माण किया गया इनमे उदाहरण के तौर पर आप समझ सकते हैं जैसे नाई,धोबी,माली, मल्लाह , लोहार आदि आदि। यह लोग अपने पैतृक काम को ही अपना आय का स्त्रोत एवं मजहब समझ बैठे हैं। जबकि इनके विपरीत सवर्णों की मानसिकता देश के शासन सत्ता पर काबिज करना लक्ष्य रहा है। मुझे लगता है यह लोग सपने में भी कभी एमपी एमएलए मिनिस्टर आदि बनाने की सोचते होंगे? इन्हे लगता है कि जीवन की मुक्ति देवालय में है जबकि बाबा साहब ने कहा है कि हमारी मुक्ति राजनीति की सत्ता अर्थात मास्टर चाबी की प्राप्ति में है। उदाहरण के तौर पर चंद पैसे के लिए एक मल्लाह तीन से चार जगह मछली पकड़ने के लिए जी तोड़ मेहनत करता है यदि यही मेहनत गर शिक्षा प्राप्त कर अपने गुलामी और बेबसी के कारण को समझ ले तो वह ब्रह्माणी षणयंत्र को समझ पाएंगे और उनके बुने हुए जाल से बाहर निकल पाएंगे। उन्हें मछली पकड़ने के अतिरिक्त अन्य काम या व्यवसाय के बारे में सोचना पाप के सामान लगता है शायद।। ऐसे सोच के परे व्यक्ति के लिए शासन सत्ता में कोई भी बैठे चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस उन्हे उनसे कोई फर्क नहीं पड़ता इसी तरह अन्य ओबीसी और व्यापारी वर्ग है जिसे राजनीति व सत्ता व्यवस्था परिवर्तन से कोई मतलब नहीं मताधिकार के दिन जितना मिल जाए वही इनके लिए वोट की कीमत है,इन्हें अपने वोट की कीमत भी नहीं मालूम कि मताधिकार की शक्ति हमें हमारे गुलामी से मुक्ति पाने को मिला है ।।एक दृष्टिकोण से देखा जाए तो ऐसा सोच वर्णाश्रम व्यवस्था से एक कदम आगे भी नहीं बढ़ना चाहता चाहे इसका कारण अशिक्षा को मानले या आश्रम व्यवस्था की रूल्स को।सबसे ज्यादा आबादी ओबीसी की है सुई से लेकर बड़े-बड़े मशीन कारखानों को यही चला रहे हैं सबसे ज्यादा कृषि कार्य में भी यही समाज लिप्त हैं दूसरी तरफ पाखंडवाद छुआछूत और असमानता के बोझ को भी ढो रहे हैं ।आदिवासी कॉम जल जंगल जमीन की अर्थात हम सबकी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है देश में वर्तमान में शेड्यूल कास्ट की भूमिका बहुजन समाज की अंगरक्षक की रूप में है जो अपने कंधे पर बहुजन समाज की हक अधिकार को प्राप्त करने की बोझ उठा रखी है। संविधान हम सब की सुरक्षा कवच है सुरक्षा कवच को सुरक्षित रखने का बीड़ा बौद्धिक वर्ग उठा रही है संविधान ने वर्ण व्यवस्था को निष्क्रिय जरूर किया है किंतु चतुर् वर्ण ने संविधान पर सत्ता के बल पर अनेक हमला करके बहूसंख्यक समाज को गुलामी के दरवाजे पर खड़ा कर दियें हैं इनमें अपने उन कपूत लोगों का भी हाथ है जो संवैधानिक /आरक्षण के बल पर बाबा साहब की कमाई का मलाई खा रहे हैं और बहुजन हित के विरुद्ध फैसले पर अपना हांथ बंटा रहे हैं। सविधान के होते हुए पूर्व की भांति जाति और असमानता समाज में फल फूल रही है?? दरअसल इनमें ही बीजेपी कांग्रेस की सांसे तथा सत्ता चल रही है इसलिए कभी भी बीजेपी कांग्रेस जाति व्यवस्था को खत्म करने की न कभी कानून पारित किया न देश में ऐसा कानून लाया।।असमानता को मिटाने की लड़ाई बौद्धिक वर्ग लड़ रही है इसलिए बीजेपी कांग्रेस दोनों पार्टी के कामरेड द्वारा कभी संविधान पर तो कभी आरक्षण पर कभी बाबा साहब या बहुजन महापुरुषों पर बेतुका बयान बाजी कर नफरत का ज़हर घोल कर हमारे ध्यान भटका रहें हैं।

मुझे कहते हुए कोई झिझक नहीं है इसमें कि हिंदुत्व (वर्ण व्यवस्था) की रक्षा करने में सबसे आगे OBC बंधु हैं। इसके लिए ओबीसी वर्ग के साथी को ही ओबीसी वर्ग में जागरूकता लाने की जरूरत है वोट की कीमत को आज भी समझने और समझाने की जरूरत है ,देश में जब तक 3rd राजनेतिक शक्ति को ओबीसी वर्ग द्वारा सपोर्ट नहीं किया जाता तब तक बीजेपी कांग्रेस मजबूत ही रहेंगे पिछड़ा वर्ग में बहुत सी जातियां जिसे अपनी शक्ति का पहचान नहीं है शेड्यूल कास्ट में भी अनेक ऐसे जाति हैं जो जाति पर गर्व करते हैं जबकि जाति व्यवस्था गर्व करने की नहीं शर्म करने की बात है। मानवता और इंसानियत के नाते एक मनुष्य का सिर्फ मनुष्य होना है पर्याप्त है यह सोच हमें लोगों के अंदर पैदा करना होगा. जाति असमानता को बनाए रखने में जाति व्यवस्था बनाने वाले से ज्यादा पालन करने वाले दोषी हैं। आधुनिक भारत में संविधान की मौजूदगी में बहुजन समाज दिनहीन दशा में जीवन व्यतीत कर रहे हैं इसके पीछे भी अनेक कारण हैं पर बहरहाल हमें शिक्षा और सत्ता प्राप्ति पर ध्यान देने की जरूरत है सरकार के भरोसे गरीबी और अपने समस्या को छोड़ देंगे तो गुलामी और निराशा ही हाथ आएगी इसलिए बीजेपी कांग्रेस की चंगुल से बाहर निकलने की जरूरत है यह कभी भी दोनों पार्टियां बहुजन जमात की भलाई नहीं चाहते आपको अपना राजनैतिक दुश्मन को पहचानने की जरूरत है और बहुजन महापुरुष को पढ़ते हुए उनके बताए रास्ते पर चलने की जरूरत है तभी हम शिक्षा के बल पर हर गुलामी के जंजीर को तोड़ पाएंगे और आने वाले नशल को हुक्मरान बना पाएंगे।

लेखक छत्तीसगढ़ के मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। लेख में व्यक्त विचार लेखक की निजी राय है।

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