महान संत कवि एवं दार्शनिक भीमा भोई

डॉ. राजकुमार| भीम भोई (1850-1895) का जन्म 1850 की वैसाख पूर्णिमा को एक बुद्धिवादी कोंध (आदिवासी) परिवार में उड़ीसा में हुआ था। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था। एक युवा के रूप में उन्हें जाति व्यवस्था पसंद नहीं थी, इसलिए वे महिमा गोसेन के शिष्य बन गए जिन्होंने महिमा धर्म शुरू किया था जिसने ब्राह्मण वादी ऊंच-नीच और जाति व्यवस्था को गंभीर चुनौती दी । बाद में भीम भोई अपनी कविताओं एवं सामाजिक आन्दोलन के कारण इतने लोकप्रिय हो गए कि महिमा धर्म उनके नाम से ही जाना जाने लगा ।
भीमा भोई का विचार था कि ‘केवल दो जातियां हो सकती हैं: नर और मादा और कोई अन्य जाति मैं नहीं जानता हूं’। एक महान दार्शनिक विचार जिसके लिए भीम भोई को जाना जाता है, वह है “मनुष्य के दुःख और पीड़ाएँ अथाह हैं, दुनिया की ख़ुशी के लिए मैं सभी यातनाएं झेलने के लिए तैयार हूँ, लेकिन मानवता को ख़ुशी से रहने दो। भीम भोई ने प्रचलित सामाजिक-आर्थिक अन्याय, धार्मिक कट्टरता और जातिगत भेदभाव के खिलाफ व्यापक रूप से लिखा। उनका मिशन “जगत उद्धार” (पूरी दुनिया की मुक्ति) था, वे एक ईश्वर, एक समाज और एक धर्म में विश्वास करते थे। वह मानवतावाद में विश्वास करते थे। यह दावा करते हुए कि जगन्नाथ वास्तव में स्वदेशी लोगों और जाति के शिकार समूहों के शास्ता थे 1874 में उन्होंने पुरी में जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश के विशाल ऐतिहासिक विरोध मार्च का नेतृत्व किया था। आज भी लोक अवधारणा हैं की यह तथागत बुद्ध की ही प्रतिमा जगन्नाथ पुरी विहार में स्थापित है जिसका रूप बदल दिया गया है।
भीमा भोई का मानवीय दर्शन और क्रांतिकारी विद्रोही काव्य विशेषतः उड़ीसा बंगाल असम छत्तीसगढ़ आन्ध्र प्रदेश में आज भी लाखों करोडो लोगों को प्रभावित करता है। उनका विश्व प्रसिद्ध अमर सन्देश UNO हॉल की दीवार पर विभिन्न भाषाओं में उकेरा गया है।
“पृथ्वी पर मानवीय दुर्दशा को देखते हुए कोई कैसे सहन कर सकता है; मैं मानवता की मुक्ति के लिए दुनिया के सारे दुःख सहने के लिए तैयार हूँ।”
“ପ୍ରାଣୀ ଙ୍କ ଆରତ ଦୁଃଖ ଅପ୍ରମିତ ଦେଖୁ ଦେଖୁ କେବା ସହୁ, ମୋ ଜୀବନ ପଛେ ନର୍କେ ପଡିଥାଉ ଜଗତ ଉଦ୍ଧାର ହେଉ।”
“witnessing the plethora of plights on earth how one could bear with; let the world get redeemed at my cost” have even been inscribed on the wall of the United Nations Organisation (UNO) Hall in various languages.
लेखक दिल्ली विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर हैं।

हमसे जुड़ें

502FansLike
5FollowersFollow

ताजातरीन

सम्बंधित ख़बर