महिला सशक्तिकरण को लेकर अद्वितीय थी जोतिबा फुले की प्रतिबद्धता

जब शादी के काफी समय बाद भी फूले दंपति के यहां कोई संतान नहीं हुई, तो जोतिबा पर उनके पिता दूसरी शादी के लिए दबाव बनाने लगे। अंतः एक दिन जोतिबा कहते हैं ठीक है मैं दूसरी शादी करने के लिए तैयार हूं लेकिन इस शर्त पर कि पहले सावित्री की मेडिकल जांच होगी और कुछ कमी पाये जाने पर, मेरी दूसरी शादी होगी और मेरी दूसरी पत्नी हमारे साथ इसी घर में रहेगी। पिता बडे उत्साह में बोले ठीक है।

लेकिन तभी स्त्री समानता एवं मुक्ति के सच्चे पुरोधा क्रान्ति सूर्य जोतिबा बोले कि बात अभी खत्म नहीं हुई है, क्योंकि अगर सावित्री स्वास्थ्य जांच में सही पाई जाती है तो फिर मेरी मेडिकल जांच होगी और अगर मेरे साथ कुछ समस्या हुई तो फिर सावित्री की हम दूसरी शादी करेंगे, और उसका दूसरा पति, हमारे ही घर में हमारे साथ रहेगा। यह सुनते ही पिता जी के होश उड़ गये, किसी भी पुरुषवादी सोच रखने वाले समाज के लिए यह शर्त उसके अस्तित्व को बुनियादी चुनौती देने के समान था l घर में इसके बाद यह बात हमेशा के लिए खत्म हो गई।

इसके बाद फूले दम्पत्ति ने निजी संतान पैदा न करने का निर्णय लिया, और बहुजन समाज को ही अपना परिवार बनाकर, बहुजन समाज निर्माण एवं उसकी मुक्ति को ही अपने जीवन का ध्येय बना लिया। धन्य है फूले दम्पत्ति जिन्होने सामाजिक परिवर्तन के आन्दोलन के लिए अपनी निजी संतान पैदा नहीं की। लेकिन बहुत खुशी और सुकून की बात है कि आज दुनिया भर में उनकी करोड़ों मानस सतानें उनकी महान विरासत का परचम बुलंद कर रही हैं।

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