राष्ट्रीय संपत्ति की सेल लगाने वाले बजट से सर्वाधिक घाटे में रहने वाली है देश की आम जनता

केंद्र की भाजपा सरकार का नया बजट जैसे सब कुछ बेचने की मुनादी करता है। एयरपोर्ट, सड़कें, बिजली ट्रांसमिशन लाइन, रेलवे के डेडीकेटेड फ्रेट कॉरीडोर के हिस्से, वेयरहाउस, गेल, इंडियन ऑयल की पाइप लाइन, बैंक और स्टेडियम भाजपा सरकार ने जिस तरह राष्ट्रीय संपत्ति की सेल लगाने की घोषणा की है वह बेहद खतरनाक भविष्य का सूचक है। यह सारी घोषणाएं यदि क्रियान्वित होती हैं तो इसका व्यापक प्रभाव होगा। आज की तारीख में रेलवे के बाद बैंकिंग सेक्टर में सबसे अधिक लोग नियोजित हैं। पिछले साल फाइनेंसियल एक्सप्रेस में प्रकाशित खबर के अनुसार मार्च 2018 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में तकरीबन 8 लाख कर्मचारी नियोजित थे। बैंकिंग क्षेत्र में निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इस क्षेत्र में कार्यरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग को प्राप्त आरक्षण पर सीधा असर होगा। यही स्थिति अन्य क्षेत्रों में भी निजीकरण को बढ़ावा देने पर होने वाली है। जिन एयरपोर्ट्स, सड़कों तथा गोदामों को निजी उद्यमी लेंगे उनके इस्तेमाल का शुल्क भी वही निर्धारित करेंगे। ऐसे में आम आदमी के लिए यह सुविधाएँ महँगी होनी तय है। कृषि कानूनों को लेकर हो रहे विवादों की पृष्ठभूमि में यह बात उभरकर सामने आ रही है कि बड़े बड़े उद्योगपति अपने गोदाम बनवा रहे हैं ताकि जमाखोरी को लेकर पुराने कानूनों के समाप्त होने के बाद फसलों और अन्य कृषि व बागवानी उत्पादों का बड़े पैमाने पर भण्डारण कर सकें। अब सरकार अपने गोदाम बेचने जा रही है तो पूर्व में व्यक्त आशंकाओं को बल मिलना स्वाभाविक है कि इससे पहले तो बड़ी कम्पनियाँ आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी करेंगी और फिर मनमाने दाम पर उन उत्पादों को बेचकर जनता का शोषण करेंगी। बिजली ट्रांसमिशन लाइन, रेल, गेल, पाइप लाइन, स्टेडियम जनता के टैक्स के पैसे से बने हैं। सरकार इन्हें बेचकर आज भले ही कुछ पैसा कमा ले लेकिन आने वाले समय में आम जनता और स्वयं सरकार को भी इन सुविधाओं के लिए जो भुगतान करना होगा वह उससे कई गुना ज्यादा होगा जितना आज सरकार इन्हें बेचकर कमाना चाहती है। यह सरकार अपने वित्तीय कुप्रबंध के कारण हुए घाटे की भरपाई के लिए या फिर सरकारी नौकरियों में आरक्षण को प्रभावी रूप से निष्प्रभावी बनाने के लिए चाहें जिस मंशा से भी इनका विनिवेश करना चाहती है वह गलत है। सरकार जिस रास्ते पर चल रही है उससे तो एक दिन पूरा देश और देश की सारी संपत्ति चंद पूंजीपतियों की जागीर बन जाएगी और देश की अधिसंख्य आबादी पूरी तरह शक्तिहीन, अर्थहीन और असहाय हो जाएगी।

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