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मुझे बदलाव चाहिए

मुझे बदलाव चाहिए संजय श्रमण मुझे बदलाव चाहिए सुधार नहीं सदियों से तुम्हारे शास्त्रों, शस्त्रों और बहियों का बोझ मेरी जर्जर देह ने ही उठाया है बैलगाड़ी में जुते बीमार बैल...

जा रे खुदगर्ज

जा रे खुदगर्ज -संतोष पटेल नहीं पड़ेगा फर्क हमें तुम्हारे वाटर कैनन के बौछार का क्योंकि हम भीतर से हैं पनगर पानी से है विशेष दोस्ती हमें पानी कीचड़ में...

मैं भारत का संविधान हूँ

मैं भारत का संविधान हूँ -दीपशिखा इन्द्रा दुनिया में जो पहचान बनी है वो तेरी पहचान हूँ मैं भारत का संविधान हूँ जीने का अधिकार हूँ पढ़ने लिखने का अधिकार...

एक संघर्षशील बहुजन योद्धा की कहानी है ‘उदुम्बरा’

डॉ. सुनील कुमार 'सुमन'| बहुजन समाज की विरासत में ऐसे बहुत से योद्धा भरे पड़े हैं जिन्होंने अपनी सूझबूझ, कठिन परिश्रम और सामाजिक समर्पण...

जागो सीता फिर से रावण योगी वेश में आया है

जागो सीता फिर से रावण योगी वेश में आया है -मुकेश चन्द्रा जागो सीता फिर से रावण योगी वेश में आया है। बेटी की रक्षा का नारा...

हैं नयन अभी तक गीले

हैं नयन अभी तक गीले -कुमार मृत्युंजय हैं नयन अभी तक गीले कैसे कर लूँ हाथ पीले तुम जो थे बस हमारे हो सके न क्यों हमारे किससे पाऊँ उत्तर...

विचारोत्तेजक विमर्श को आगे बढ़ाती पुस्तक है ‘और कितने रोहित’

डॉ. सुनील कुमार 'सुमन'|'आँखन देखी' दलित-आदिवासी साहित्य का मूल मर्म तथा असली ताक़त रहा है। बहुजन समाज का यह 'आँखन देखी', द्विज समाज के...

प्रज्ञाबाली की कविताएं

प्रेम ही बगावत -प्रज्ञाबाली प्रेम में पड़ी स्त्री क्या करती है प्रेम करती है यानी बगावत करती हैं? प्रेम में पड़ी स्त्री खानदान से बगावत करती हैं? वह...

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