सूर्यकुमार यादव जैसे खिलाड़ियों के साथ होने वाले खेल को समझना जरुरी

आईपीएल 2020 में अपनी शानदार बल्लेबाजी से प्रशंसकों का दिल जीतने वाले सूर्यकुमार यादव को ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए टीम इंडिया में नहीं चुना जाना वाकई एक हैरान करने वाला निर्णय है। विश्व के सर्वकालिक श्रेष्ठतम बल्लेबाजों में शुमार किये जाने वाले ब्रायन लारा तक ने भारतीय चयनकर्ताओं के इस निर्णय को समझ से परे बताया है। वहीं सचिन तेंदुलकर, सौरभ गांगुली तथा रवि शास्त्री जैसे दिग्गज भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार को ढांढस दे रहे हैं। लेकिन जिन्हें भारतीय समाज और सामाजिक व्यवस्था की जरा भी समझ है उनके लिए इस बात को समझना इतना भी मुश्किल नहीं है कि सूर्यकुमार को विदेशी धरती पर आईपीएल जैसे विश्व स्तरीय टूर्नामेंट में इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद टीम इंडिया में शामिल क्यों नहीं किया गया। असल में हमारे देश में जहाँ योग्यता को कुछ जाति विशेष का विशेषाधिकार माना जाता रहा है वहाँ सूर्यकुमार, हिमा दास, विनोद काम्बली, पीटी उषा, दीपा करमाकर जैसों के लिए हमेशा से हालात प्रतिकूल रहे हैं।

सूर्यकुमार भले ही पिछले दो वर्षों से लगातार अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे हों, लेकिन उनका कोई गॉड फादर नहीं है, और ना ही वह भारतीय समाज के परम्परागत विशेषाधिकार सम्पन्न, सुविधाभोगी, प्रभु वर्ग का हिस्सा हैं, ऐसे में ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए टीम इंडिया में उन्हें नहीं रखे जाने में कुछ भी बहुत असामान्य नहीं है। सूर्यकुमार न तो कोई पहले खिलाड़ी हैं और ना ही आखिरी, जिसे यह सब कुछ झेलना पड़ रहा हो। जो लोग सूर्यकुमार को ढांढस दे रहे हैं वह अपने आप में इतने प्रभावशाली और सक्षम हैं कि किसी मोहल्ले के क्रिकेटर को भारतीय टीम का हिस्सा बना दे। लेकिन सूर्यकुमार को उनके अच्छे प्रदर्शन का इनाम देने की बजाय वह अगर सिर्फ सांत्वना दे रहे हैं तो इसकी वजह को कोई भी आसानी से समझ सकता है। सूर्यकुमार जैसे खिलाड़ियों के साथ होने वाले इस तरह के भेदभाव को हम रोक पाते हैं या नहीं यह तो भविष्य के गर्भ में है लेकिन इस प्रवृत्ति का पुरजोर तरीके से विरोध किया ही जाना चाहिए। आखिर कब तक हम एकलव्य के उत्पीड़न को मौन देखते रखेंगे?

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